इस कोरोना के विपदा ने आपको भी सोचने और समझने का एक मौका दिया है की जिस पार्टी को आपने अपने माथे बिठाया और देश की गद्दी सौपा उस पार्टी के नेता आपके लिये क्या कर रहें है या कितने चिंतित है।मैं एक -कर सबके बारे में यहाँ आपको अपडेट दूँगा।
अभी देश में जो समस्या है वो एक वायरस का है जिसका नाम कोरोना है और यह लोगों के स्वास्थ पर असर डालता है और जाहिर सी बात है की ऐसे समय में सर्वाधिक सक्रिय स्वास्थ्य मंत्रालय और स्वास्थ मंत्री को होना चाहिऐ हालांकि किसी आपदा में सक्रियता तो सबकी बढ़नी चाहिऐ।इस तस्वीर को देखिए और समझिए की जिस स्वास्थ मंत्री को अभी आपकी चिंता करनी चाहिऐ वो निश्चिंत होकर लुडो खेल रहें है।यह निश्चिंतता बहुत कुछ बयां कर रहा है , यह बता रहा है की जनता से हमें बस चुनाव के वक्त मतलब रखना है।कुछ भावनात्मक बातें होंगी , हिंदू - मुसलमान होगा , भारत - पाकिस्तान होगा और देश के लोग हमें वोट करेंगे ही।यह निश्चिंतता आप पर भी सवाल खड़ा करता है की आप जब वोट करते है तो क्या सोचकर वोट करते है और आपको क्या प्राप्त होता है।
मैं ट्विटर पर काफी सक्रिय रहता हूँ और अन्य देशों के नेताओं पर भी नजर रखता हूँ। यकीन मानिए किसी भी देश जहाँ कोरोना फैला वहाँ के नेताओं में मैंने ऐसी निश्चिंतता नहीं देखा।वहाँ के नेता दिनभर सोशल प्लेटफार्म और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस महामारी का मॉनिटरिंग करते रहें।इस संबंध में हमें ब्रिटेन के पीएम बॉरिस जॉनसन से सीखना चाहिऐ जो कोरोना पॉजिटिव होते हुये भी देश के गतिविधियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देख रहें है।हमारे नेताओं को अगर हो जाए तो वो नजर भी नहीं आएँगे।
देश के लोगों के लिये इस वक्त अगर इस बीमारी से लड़ने का समय है तो सता में बैठे नेताओं के लिये परीक्षाओं का समय है।वो देख रहें है की जिस वक्त स्वास्थ्य मंत्री को हमारी चिंता करनी चाहिऐ , स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों को मॉनिटरिंग करनी चाहिऐ और अगर कहीं व्यवस्था लचर हो तो उसे फौरन दुरुस्त करनी चाहिऐ इसके बदले वो घर में अपनी पत्नी के साथ बेफिक्र होकर लुडो खेल रहें है।
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अभी देश में जो समस्या है वो एक वायरस का है जिसका नाम कोरोना है और यह लोगों के स्वास्थ पर असर डालता है और जाहिर सी बात है की ऐसे समय में सर्वाधिक सक्रिय स्वास्थ्य मंत्रालय और स्वास्थ मंत्री को होना चाहिऐ हालांकि किसी आपदा में सक्रियता तो सबकी बढ़नी चाहिऐ।इस तस्वीर को देखिए और समझिए की जिस स्वास्थ मंत्री को अभी आपकी चिंता करनी चाहिऐ वो निश्चिंत होकर लुडो खेल रहें है।यह निश्चिंतता बहुत कुछ बयां कर रहा है , यह बता रहा है की जनता से हमें बस चुनाव के वक्त मतलब रखना है।कुछ भावनात्मक बातें होंगी , हिंदू - मुसलमान होगा , भारत - पाकिस्तान होगा और देश के लोग हमें वोट करेंगे ही।यह निश्चिंतता आप पर भी सवाल खड़ा करता है की आप जब वोट करते है तो क्या सोचकर वोट करते है और आपको क्या प्राप्त होता है।
मैं ट्विटर पर काफी सक्रिय रहता हूँ और अन्य देशों के नेताओं पर भी नजर रखता हूँ। यकीन मानिए किसी भी देश जहाँ कोरोना फैला वहाँ के नेताओं में मैंने ऐसी निश्चिंतता नहीं देखा।वहाँ के नेता दिनभर सोशल प्लेटफार्म और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इस महामारी का मॉनिटरिंग करते रहें।इस संबंध में हमें ब्रिटेन के पीएम बॉरिस जॉनसन से सीखना चाहिऐ जो कोरोना पॉजिटिव होते हुये भी देश के गतिविधियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देख रहें है।हमारे नेताओं को अगर हो जाए तो वो नजर भी नहीं आएँगे।
देश के लोगों के लिये इस वक्त अगर इस बीमारी से लड़ने का समय है तो सता में बैठे नेताओं के लिये परीक्षाओं का समय है।वो देख रहें है की जिस वक्त स्वास्थ्य मंत्री को हमारी चिंता करनी चाहिऐ , स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों को मॉनिटरिंग करनी चाहिऐ और अगर कहीं व्यवस्था लचर हो तो उसे फौरन दुरुस्त करनी चाहिऐ इसके बदले वो घर में अपनी पत्नी के साथ बेफिक्र होकर लुडो खेल रहें है।

लोग जादा डर गये है ! लोगो को इतना डरने की कोई जरूरत नही!
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